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आखिर किस खेल के चैंपियन थे राजीव गाँधी, जो देश का सर्वोच्च खेल अवार्ड उनके नाम पर है : अश्विनी उपाध्याय

Ashwini Upadhyay - अश्विनी उपाध्याय
Ashwini Upadhyay – अश्विनी उपाध्याय

देश में कई ऐसी चीजें है जो क्यों है इसका रहस्य कोई आजतक नहीं समझ सका है, कई चीजें है – नेहरु के नाम पर देश के 5 सबसे बड़े फुटबॉल स्टेडियम के नाम है 

जबकि नेहरु के कारण ही भारतीय फुटबॉल का सर्वनाश ऐसा हुआ की आजतक भारतीय फुटबॉल गुमनाम है, इसके अलावा एक और बड़ी चीज है जिसका रहस्य आजतक किसी को पता नहीं चल सका है

इस बात को पहले भी कई लोगों ने उठाया है, और अब इस बात को वकील अश्विनी उपाध्याय ने उठाया है – अश्विनी उपाध्याय ने सवाल पुछा है की, आखिर इंदिरा गाँधी के बेटे राजीव गाँधी किस खेल के चैंपियन थे की भारत का सबसे बड़ा खेल अवार्ड उनके नाम पर रखा गया है 

बता दें की भारत का सबसे बड़ा खेल अवार्ड है “राजीव गाँधी खेल रत्न अवार्ड”, जबकि काफी समय से देश के राष्ट्रवादी खेलों का सर्वोच्च अवार्ड मेजर ध्यानचंद के नाम पर करने की मांग कर रहे है, मेजर ध्यानचंद भारत में खेलों के सबसे बड़े आइकॉन हैं 

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पर हमारे देश में खेलों का सबसे बड़ा अवार्ड राजीव गाँधी के नाम पर है, जबकि राजीव गाँधी किसी भी खेल में राष्ट्रीय, स्टेट तो छोडिये, ग्राम लेवल के भी खिलाडी नहीं थे, पर किस मानसिकता से हमारे खेल अवार्ड का नाम उनके नाम पर रखा गया है ये समझ से परे है 

गाँधी नेहरु और इस खानदान के नाम पर देश के अधिकतर चीजों का नाम है, और ये लोग ये भी कहते है की भारत को आज़ादी इनके परिवार ने दिलाई है, जबकि सच ये है की 1857 से लेकर 1947 तक अंग्रेजो के ही मुताबिक 8 लाख 20 हज़ार भारतीयों को उन्होंने बलिदानी कर दिया था, और इन 8 लाख 20 हज़ार भारतीयों में कांग्रेस का नेता 1 भी नहीं था 

ये देश का दुर्भाग्य ही है की असल बलिदानी आज भी गुमनाम है, और राजीव गाँधी जैसों के नाम पर देश के अवार्डों का नाम है, ये अन्याय है और समाज को इसके खिलाफ अपनी आवाज को तेज करने की जरुरत है, ताकि जो लोग असल सम्मान के हक़दार है उनको सम्मान मिले 

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