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फर्जी SC/ST एक्ट के केस ने कर दी निर्दोष वैभव और उसके पिता की जिंदगी बर्बाद, सिर्फ दमन

नोट : पहले आपको बता दें की हम खुद OBC वर्ग से है, किसी जनरल वर्ग से नहीं, पर हम खुद को सबसे ऊपर मानते है क्यूंकि हम खुद को सिर्फ हिन्दू मानते है

आज हम आपको बिचारे वैभव के केस के बारे में बता रहे है, किस तरह दमनकारी कानून से इस लड़के और इसके पिता की जिंदगी तबाह और बर्बाद कर दी गयी, ये मानवता का मामला है, और सरासर अन्याय और अत्याचार है, और आपको इसका विरोध करने के लिए जनरल होने की जरुरत नहीं है

आप इन्सान है तो आप दमन का विरोध करेंगे ही करेंगे, सरासर अत्याचार दमन का मामला है, और हम OBC होकर इसका विरोध कर रहे है क्यूंकि हमे साफ़ दिख रहा है ये दमन है, अत्याचार है, अमानवीय है

ऊपर जिस लड़के की तस्वीर आप देख रहे है इसका नाम वैभव है, ये भोपाल का रहना वाला है और मेधावी मेडिकल छात्र था, ये इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज के छात्र रहे है, 2011 में नेहा नाम की एक लड़की ने वैभव से कहा की तुम मेरी बहन पूजा के लिए मेडिकल की परीक्षा दो, तुम उसकी सीट पर बैठकर एग्जाम लिख दो, मैं तुम्हे उसकी सीट पर बिठवा दूंगी

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वैभव ने नेहा के फर्जीवाड़े के ऑफर को ठुकरा दिया और अन्य छात्रों से भी कहा की इस तरह का फर्जीवाडा वो न करें, फिर नेहा को इसी बात से वैभव से दुश्मनी हो गयी

27 अक्तूबर 2012 को नेहा ने वैभव पर SC/ST एक्ट के तहत मामला पुलिस में दर्ज करवा दिया और कहा की वैभव ने मेरे खिलाफ जातिसूचक शब्द इस्तेमाल किये है, पुलिस ने वैभव के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(1), (10) और 3 (1)(11) में केस दर्ज कर लिया,  वैभव को गिरफ्तार कर लिया गया और 4 अप्रैल 2013 में कोर्ट में चालान पेश किया गया। बाद में वैभव पर आइपीसी की धारा 294, 506, 469, 500 और 354 भी बढ़ा दी

लम्बी सुनवाई हुई और अब 1 अगस्त 2018 को अदालत ने पुरे मामले को फर्जी पाया और वैभव को मामले से बरी कर दिया, नेहा ने जो आरोप लगाये थे सब झूठे साबित हुए

  • गवाहों के बयान में यह बात सामने आई कि नेहा ने छोटी बहन पूजा को पीएमटी पास कराने के लिए वैभव को स्कोरर बनने को कहा था। वैभव ने इससे मना कर दिया था।
  •  एससी-एसटी एक्ट में केस दर्ज कराने से पहले नेहा के मित्र जितेंद्र मालवीय ने ११ फरवरी २०१३ वैभव को फोन किया था और नेहा की तरफ से पैसों की मांग की थी। नहीं देने पर केस दर्ज कराने की धमकी दी थी। फोन की रिकॉर्डिंग कोर्ट में पेश की गई थी।
  • नेहा कोर्ट में यह तक साबित नहीं कर सकी कि वह अनुसूचित जनजाति से है। इससे जुड़े कोई सबूत पेश नहीं हुए। जाति प्रमाण पत्र की फोटो कॉपी पेश की गई जो कोर्ट ने वैध नहीं मानी।
  • फर्जी फेसबुक आइडी बनाने और उस पर अश्लील फोटो और कमेंट करने से जुड़े आरोप भी कोर्ट में साबित नहीं हुए।
  • कॉलेज प्रांगण के जिस स्थान पर वैभव द्वारा जातिसूचक शब्द कहने और हाथ पकडऩे की घटना बताई गई वह कोर्ट में साबित नहीं हुई।

ये तो हुई केस की बात, पर 2011 से 1 अगस्त 2018 तक वैभव पर क्या बीती वो भी आपको जानना चाहिए

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वैभव एक बढ़िया मेडिकल छात्र था, केस होने पर इसको जेल जाना पड़ा, कई कई बार इसे जेल जाना पड़ा और 50 दिन तो इसे जेल के अन्दर बिताना पड़ा, इसने अपना मेडिकल का टेस्ट भी हत्कड़ी में दिया, जेल, केस, हत्कड़ी की प्रताड़ना के बाद भी इसने MBBS की परीक्षा को पास किया

पर इसके ऊपर केस था तो इसे किसी ने नौकरी भी नहीं दी, इस बिचारे के पिता को सदमे से लकवा मार गया, और अब भी उनको लकवा है, वो सिर्फ कुर्सी और बिस्तर पर पड़े रहते है

फर्जी केस करने वाली नेहा के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गयी क्यूंकि फर्जी केस करवाने वालो पर कानून में कोई कार्यवाही का नियम ही नहीं है, किस तरह SC/ST एक्ट का इस्तेमाल लोगों के दमन के लिए किया जाता है ये एक उदाहरण है, वैभव एकमात्र नहीं है जिसका इस प्रकार दमन किया गया है, ऐसे देश भर में हजारों उदाहरण है, और इसके खिलाफ बोलने के लिए आपको जनरल होने की जरुरत नहीं है, खुलेआम दमन चल रहा है बस आपको इन्सान होने की जरुरत है तो आपको दमन दिखाई देगा

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