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जानिये उस विलक्षण नायक की कहानी जो हैं भारतीय संविधान के वास्तविक रचयिता

अंग्रेजों के उत्पीड़न को 200 सालों तक सहने के बाद 1947 में गुलामी की ज़ंजीर से भारत आज़ाद हुआ था। सही अर्थों में स्वतंत्रता भारत को 1950 में मिली जब वह एक लोकतांत्रिक गणराज्य बना। भारतीय संविधान का प्रारूप सात विशेषज्ञों की एक कमीटी के द्वारा तैयार किया गया जिसका नेतृत्व डॉ भीम राव अम्बेडकर ने किया। इस मसौदे पर बहस हुई, काट-छांट की गई और अंत में संविधान सभा ने दुनिया के सामने विश्व का सबसे बड़ा संविधान पेश किया।

ज्यादातर लोग यह नहीं जानते कि किस व्यक्ति ने संविधान को अकेले अपने दम पर तैयार किया था।  सर बेनेगल नर्सिंग राव ने अकेले ही उस प्रारंभिक प्रारूप को तैयार किया था, जिसे नवंबर 26,1949 को कमीटी को सौंप दिया गया था। अंबेडकर जी के नेतृत्व में ड्राफ्टिंग कमीटी ने यह घोषित किया कि ‘ड्राफ्ट संविधान’ सलाहकार बीएन राउ की देखरेख में बनाई गई विश्व के श्रेष्ठ संविधानों में से एक है।

बेनेगल जी का जन्म 26 फरवरी 1887 में एक बुद्धिजीवी परिवार में हुआ था। वे बहुत ही प्रतिभावान विद्यार्थी थे और 1901 में उन्होंने मैट्रिक में पूरे मद्रास प्रेसीडेंसी में टॉप किया था। उसके बाद इन्होंने तीन विषयों, अंग्रेजी, फिजिक्स और संस्कृत में ग्रेजुएशन किया और 1906 में गणित में भी प्रथम रहे। इसके बाद उन्हें स्कालरशिप मिली और वे 1909 में कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज चले गए।

बेनेगल जी ने उसी साल भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा पास की और भारत लौट आये। मद्रास और कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट बेनेगल जी 1910 में भारतीय सिविल सेवा में दाखिल हुए। वे न्यायतंत्र के लिए काम करने लगे और ईस्ट बंगाल के बहुत से जिलों में उन्होंने बतौर जज अपनी सेवाएं दी। भारतीय वैधानिक कोड का पूरा संशोधन करने के बाद वे कोलकाता के बंगाल हाई कोर्ट के जज बन गए।

1935 में बेनेगल जी ने भारत सरकार के रिफॉर्म ऑफिस के साथ मिलकर गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया एक्ट, 1935 के ड्राफ्टिंग का काम किया। इस प्रोजेक्ट के अंत में भारतीय फ़ेडरल कोर्ट के पहले चीफ जस्टिस सर मौरिस ग्व्येर ने सलाह दी कि बेनेगल को फ़ेडरल कोर्ट में जज बनने के लिए पांच साल का अनुभव चाहिए। उसके बाद उन्होंने कोलकाता हाई कोर्ट में अपनी सेवाएं दी।  अपने कार्यकाल के दौरान बेनेगल जी ने दो और प्रोजेक्ट पर काम किया जिसमें उन्हें भारत सरकार ने काम सौंपा था। पहला प्रोजेक्ट भारत में रेलवे मजदूरों की काम करते हुए वातारवरण की दशा की जाँच के लिए अध्यक्षता की थी और दूसरा हिन्दू कानून में सुधार के विषय पर काम करना था।

कुछ सालों के बाद 1944 में बेनेगल जी को जम्मू और कश्मीर राज्य का प्रधानमंत्री बना दिया गया।  उनके द्वारा किये कामों के लिए उन्हें 1934 में न्यू ईयर ऑनर लिस्ट में कम्पैनियन ऑफ़ द आर्डर ऑफ़ द इंडियन एम्पायर का अवार्ड मिला और 1938 में नाइटहुड की उपाधि मिली। वे 1944 में सेवा निवृत हुए और फिर उन्हें जम्मू और कश्मीर का प्रधान मंत्री बना दिया गया। उन्होंने कश्मीर के महाराजा के साथ मतभेद के चलते 1945 में इस्तीफ़ा दे दिया।

इसके बाद बेनेगल जी को 1946 में संविधान सभा का संवैधानिक सलाहकार नियुक्त कर दिया गया। उन्होंने म्यांमार के संविधान की भी ड्राफ्टिंग की थी और 24 सितम्बर 1947 को जिसे अपनाया गया। बेनेगल संविधान के उस अंतिम ड्राफ्ट को जब अपनाया गया तब वहां रंगून में भी मौजूद थे। बेनेगल जी ने यूनाइटेड नेशन में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया। यूएन में 1949 से 1952 तक वे भारत के परमानेंट प्रतिनिधि बने रहे। जब उन्हें हेग के इंटरनेशनल कोर्ट का जज नियुक्त किया गया तब तक उन्होंने यह काम किया। जून 1950 में उन्होंने प्रेजिडेंट ऑफ़ द यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी कौंसिल के रूप में में भी अपनी सेवा दी।

1952 में उन्हें मिनिस्ट्री ऑफ़ एक्सटर्नल अफेयर्स का आमंत्रण मिला जिसमें उन्हें इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस के चुनाव के लिए बुलाया गया यहाँ से उन्होंने अपनी सेवाएं दी । एक साल तक उन्होंने यहाँ अपनी सेवाएं देने के बाद ख़राब तबियत होने की वजह से वे जुरिख चले गए। 1988 में भारत सरकार ने उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किये।  बेनेगल हमारे देश के उन गुमनाम नायकों में से एक हैं जिन्होंने देश की कई भूमिकाओं में सेवा  की । उनके द्वारा किये गए कामों के लिए पूरा देश गौरवान्वित है।

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3 Comments

  1. Like!! Thank you for publishing this awesome article.

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